Saturday, June 20, 2020

Chudai Ki Kahani Kaamwali Ki

Chudai Ki Kahani Kaamwali Ki


कामुक कहानी पढ़ने वाले दोस्तों को मेरा नमस्कार। मेरा नाम मोहन गुप्ता (उम्र २२) है। मैं नोएडा में रहता हूँ। मुझे पोर्न वीडियोस देखना और कामुक कहानी पढ़ना पसंद है।

मैंने घर बैठे वीडियोस और कहानी पढ़कर इतनी बार हस्तमैथुन किया है कि अब मेरा सेक्स पर का नज़रियाँ बदल चुका है। यह बदलाव कुछ हफ़्ते पहले मुझमें आया था।



हुआ यूँ कि मेरे पिताजी रिटायर होने वाले थे, इसलिए उनकी कंपनी ने उन्हें और माँ को एक वेकेशन ट्रिप पर जाने का न्योता दिया था। जब माँ और पिताजी वेकेशन ट्रिप पर गए, तब उन्होंने मेरे लिए घर में एक खाना बनाने वाली बाई को कुछ दिनों के लिए नौकरी पर रखा था।

उसका नाम विमला था। वह मेरे कई दोस्तों के घर जिनके माँ-पिताजी नौकरी पर जाते हैं, उनके लिए खाना बनाती थी। मैंने विमला को कभी देखा नहीं था, बस उसके बारे में सुना था।

जिस दिन से विमला मेरे घर खाना बनाने आने वाले थी, उस दिन मेरे दोस्त ने मुझे फ़ोन करके चिढ़ाया कि विमला के साथ कोई ऐसी-वैसी हरकत मत करना। उस वक़्त तो मैंने उसकी बात को मज़ाक समझकर टाल दिया था।

जब विमला मेरे घर पर आई, तब मैं उसका सुडौल बदन देखकर बावला हो गया था। विमला थी तो गाँव से आई हुई एक अनपढ़-गवार औरत, लेकिन उसका जिस्म किसी सेक्सी मॉडल से कम नहीं था।

वह एक पुरानी सलवार कुर्ती पहनकर आई थी, जिसमें उसकी मोटी चूचियाँ और चर्बीदार गाँड़ उभरकर बाहर निकले थे। विमला रसोई-घर में जाकर दोपहर का खाना बनाने लगी। मैं विमला का बदन देखने के बहाने रसोई-घर के चक्कर काटने लगा था।

मैंने देखा कि विमला बार-बार अपनी गाँड़ की दरार में फ़सी सलवार को पकड़कर खींचती थी। खाना परोसते वक़्त, विमला दुपट्टा पहनना भूल गई थी, इसलिए आगे झुकते वक़्त उसकी गोल-मटोल चूचियाँ दिखने लगे थे।

विमला ने मुझे उसके चूचियों को ताड़ते हुए देख लिया, मगर खाना परोसते समय उसके हाथ में कटोरी और चम्मच होने की वज़ह से वह कुछ कर नहीं पाई।

मैंने एक पोर्न वीडियो देखि थी, जिसमें एक लड़का अपनी कामवाली को पैसों का लालच देकर उसकी चुदाई करता है। मैंने खाना खाने के बाद विमला पर वही तरक़ीब आज़माने के लिए अपने कमरे में जाकर २, ००० रुपए लेकर विमला के पास आया।

विमला अपना दुपट्टा पहनकर जा रही थी, तभी मैंने उसका दुपट्टा नीचे किया और २, ००० रुपए की नोट को उसकी चूचियों के बिच घुसा दिया। विमला हैरान होकर मुझे देखने लगी थी और शायद वह मेरे इरादों को समझ गई थी।

[विमला:] देखो साहब, यह सब काम मुझसे नहीं होगा। मुझे और भी जग़ह काम करने जाना है।

[मैं:] तुम्हारी मर्ज़ी। वैसे भी यह पैसे तुम्हें मज़े करने के मिल रहे है। तुम अगर काम करके पैसा कमाना चाहती हो तो शौक़ से जाओ।

[विमला:] सर, मेरे पहले से ही २-बच्चे हैं, अगर मैं आपके साथ बच्चा पैदा करूँगी तो मेरा पति मुझे मार देगा।

मुझे उस अनपढ़-गवार औरत को समझाना पड़ा कि लौड़े का पानी चूत के अंदर डालने से ही बच्चे पैदा होते हैं। उसे समझाने के बाद, मैं विमला को मेरे कमरे में लेकर आया। वह मुझसे आगे चल रही थी। उसकी मोटी मटकती गाँड़ देखकर मुझसे रहा नहीं गया।

मैंने उसका हाथ पकड़कर उसे अपनी तरफ़ घुमाया और उसकी कमर को कसके पकड़कर उसके होंठों की चुम्मियाँ लेने लगा। चुम्मियाँ लेते वक़्त, मैंने विमला की उभरी हुई गाँड़ को पकड़कर दबाना शुरू किया।

मैंने विमला की सलवार के अंदर अपने हाथों को घुसा दिया और उसके मोटे चूतड़ को दबाने लगा। उसके मुँह से सिसकियाँ लेते समय निकलती गरम साँसे सूँघकर मैं उसे पकड़कर अपनी तरफ़ ज़ोर से दबाने लगा था।

रसोई-घर में काम करने की वज़ह से उसकी उभरी हुई गाँड़ पसीने से चिकनी हो चुकी थी। मैंने अपनी उँगली को विमला की गाँड़ की छेद में घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा। उसने अपनी कुर्ती उतार दी और फ़िरसे मुझे कसकर पकड़ लिया।

मैंने अपना एक हाथ विमला की सलवार से निकालकर उसकी चूचियाँ दबाने लगा। उसने अपना टाइट ब्रा निकालकर अपने मोटे चूचियों को आज़ाद कर दिया। उसकी लटकती चूचियों को देखकर मेरा लौड़ा तनकर खड़ा हो गया।

विमला ने मेरी पैंट के अंदर हाथ ड़ालकर मेरे लौड़े को पकड़ लिया और उसे हिलाते हुए एकदम कड़क कर दिया। मेरी गोटियों को सहलाते हुए उसकी मालिश भी करने लगी। अपने दोनों हाथों से मैं उसकी चूचियाँ दबाकर विमला को गरम कर रहा था।

मैंने उसके निप्पल को एक-एक करके चूसना शुरू किया। थोड़ी देर बाद, मैं नीचे फ़र्श पर बैठ गया और विमला मेरी पैंट उतारकर मेरे सामने बैठ गई। मेरी गोटियों को अपने मुँह में भरकर उन्हें ज़ुबान से चाटने लगी।

मैंने विमला को उठाकर उसकी गोरी गाँड़ को अपने मुँह के ऊपर रख दिया और उसे अपने ऊपर चढ़ाकर बिठा दिया। उसकी गाँड़ की छेड़ से ऐसी मदहोश कर देने वाली सुगंद आ रही थी, जिससे मेरी हवस की आग बढ़ गई थी।

मैं उसकी चूतड़ को फ़ैलाकर उसकी गाँड़ की छेद में अपनी ज़ुबान घुसाकर उसे अंदर-बाहर करने लगा। विमला मेरे लौड़े को अच्छी तरह से चूस रही थी। उसकी चूत पँखुड़ियों को मैं अपनी उँगली से फ़ैलाकर रगड़ रहा था।

विमला जोश में आकर चीख़ने लगी और साथ में अपनी गाँड़ को मेरे मुँह पर उछालने लगी। थोड़ी देर बाद, विमला की चूत से पानी छूटने लगा था। मैंने उसे ज़मीन पर लेटा दिया और उसके पैरों को अपने कंधो पर रख दिया।

मैं अपने लौड़े की नोक को विमला के चूत की दरार पर रखकर रगड़ने लगा। फिर धीरे से अपने लौड़े को उसकी गरम चूत में घुसा दिया। धीरे-धीरे धक्के मारकर मैं विमला के ऊपर चढ़ गया।

उसके मोटे चूचियों को पकड़कर मैं उन्हें दबाने लगा। विमला मेरी गाँड़ को पकड़कर उसे दबा रही थी। धीरे से चुदाई करते समय हम दोनों सिसकियाँ लेने लगे थे। मैंने विमला के मंगलसूत्र को अपने हाथ में पकड़कर ज़ोर-ज़ोर से उसकी चूत में धक्के मारने लगा। मंगलसूत्र के साथ उसको चोदने में मुझे मज़ा आ रहा था।

मंगलसूत्र की माला को मैंने विमला के मुँह में डाल दिया और उसपर चढ़कर उसके मुँह को चाटने लगा। अपने हाथों से उसकी टाँगे पकड़कर मैंने ज़ोर-ज़ोर से चोदना जारी रखा था।

कुछ देर बाद, विमला ने मंगलसूत्र की माला को थूक दिया और मेरे मुँह को पकड़कर चाटने लगी। ज़ोर की चुदाई के मज़े लेते हुए हम दोनों एक दूसरे के होठों को चूसने लगे।

थोड़ी देर बाद, मैं फर्श पर लेट गया और विमला को मेरे ऊपर चढ़ा लिया। उसने मेरे लौड़े को पकड़कर अपनी चूत के अंदर घुसा दिया और धीरे से उसपर बैठ गई। २-३ बार धीरे से उठकर-बैठकर मेरे लौड़े को अपनी चूत के अंदर पूरा घुसा दिया।

फिर विमला मेरे लौड़े पर उछलने लगी थी। मैंने उसकी चूचियों को पकड़कर उन्हें दबाने लगा। विमला अपनी गाँड़ उठा-उठाकर मेरे लौड़े पर उछल रही थी। उसकी चीख़ों की आवाज़ सुनकर मुझसे और रहा नहीं जा रहा था।

मैंने उसे अपनी तरफ़ खींचकर गले से लगा लिया और उसकी गाँड़ को पकड़कर, ज़ोर-ज़ोर से अपना लौड़ा उसकी चूत के अंदर घुसाने लगा। विमला की चीख़ों को रोकने के लिए मैंने अपनी ज़ुबान उसके मुँह के अंदर घुसा दिया था।

उसकी गाँड़ की छेद में अपनी उँगली घुसाकर उसे अपने लौड़े पर पटकता रहा। कुछ देर तक ऐसे ही ज़ोर-ज़ोर से चुदाई करने के बाद मेरे लौड़े का माल निकलने वाला था। मैंने विमला को अपने ऊपर से हटाकर उसे कुतिया बना दिया।

विमला की चूतड़ को फ़ैलाकर मैं उसकी गाँड़ की दरार को चाटने लगा। पसीने से भीगी हुई उसकी गाँड़ की महक तो मुझे नशे में डाल रही थी। मैंने अपनी दो उँगलियों को विमला की गाँड़ की छेद के अंदर घुसाकर अंदर-बाहर करने लगा।

मैंने उसकी गाँड़ की छेद को खींचकर चौड़ा किया और उसके अंदर थूक मारी। मुझे अपना लौड़ा उसकी गाँड़ में घुसाना था लेकिन विमला ने मेरे लौड़े को पकड़ लिया। इसलिए मैंने अपने लौड़े को उसकी गहरी चूतड़ के बिच घुसाकर हिलाने लगा।

जैसे ही मेरा लौड़े का पानी छूटने आया, मैंने विमला की गाँड़ की छेद के पास अपने लौड़े की नोक को रख दिया। मेरे लौड़े से निकला गरम चिपचिपा पानी जाकर विमला की गाँड़ की छेद के ऊपर गिरा।

विमला कपड़े पहनकर चली गई। रात का खाना बनाने के लिए उसने अपने साथ एक औरत को भी लाया था। कहानी की अगली कड़ी में मैं आप लोगों को बताऊँगा कि आगे क्या हुआ था।

यदि आप इस कहानी को पसंद करते हैं और कमैंट्स करते हैं, तो मैं अगली कड़ी ज़ल्द से ज़ल्द पेश करूँगा।
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